जरूर कोई तो लिखता होगा ...
कागज़ और पत्थर का भी नसीब,
वरना ये मुमकिन नहीं की ...
कोई पत्थर ठोकर खाये,
और कोई पत्थर भगवान् बन जाये,
और कोई कागज़ रद्दी,
और कोई कागज़ गीता बन जाये।
तुझे पाकर मेरी ज़िंदगी खुशहाल हो गई, दामन मे मेरे खुशियां हज़ार हो गईं। न भूलूंगा ये पल कभी "बिटिया" जिस पल तुझे पाया है, ऐसा लगता है भगवान खुद मुझ गरीब के घर आया है।। Lavanaya Yadav
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